गुरुवार, 14 अक्टूबर 2010

अनमोल मोती

अपनी लड़की को विदा करते हुए रोती है माँ,
और जब पहली बार उसे गले लगाया था,
तब अपनी आँखें आसूँओ से भर लेती है माँ...

कल जो खिलाड़ी हारने के गम से रो रहा था,
आज वो ही खिलाड़ी जीतने की ख़ुशी से
अपने आसूँओ को रोक नहीं पा रहा था...

रोते हुए बिछड़ जाते है दो दोस्त,
बिरहा के बाद जब मिलते है,
तो आँखों में पानी दे जाते है दोस्त...

रोते हुए आया था इंसान,
शायद इस लिए इतना गहरा रिश्ता है उसका
इन खुबसुरत अनमोल मोतीयों से...

शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2010

एक अवलोकन के बाद शुरुआत

बहुत अन्य भाषा के ब्लॉग देखने के बाद एक आभास हुआ की शायद हम अपनी राष्ट्रभाषा और मातृभाषा से दूर जा रहे है...ऐसा नहीं है की कोई हिन्दी में ब्लॉग नहीं लिखता है, लोग लिख रहे है परन्तु उनकी पहुँच बहुत कम है...और ज़्यादातर ब्लॉग आज कल अंग्रेज़ी में लिखे जा रहे है | मैं भी उन ही में से एक हूँ | जी हाँ मैं भी अंग्रेज़ी में ही लिखता आ रहा हूँ....पर कुछ कुछ पोस्ट हिन्दी में भी किये है...

लेकिन बड़े दिनों से यह आभास हो रहा है की मैं भी उसे हिन्दी भाषा में परिवर्तित कर दूं...परन्तु यह मन नहीं मानता...उसे दिल जो लगा है...पहला ब्लॉग है ना...तो मैंने सोचा क्यों ना एक नया ब्लॉग शुरू किया जाए...जो पूरी तरह से हिन्दी में होगा...और इसलिए मैंने ये ब्लॉग शुरू किया है...

इस ब्लॉग में क्या लिखता हूँ उसका भी अनुमान नहीं है मुझे....एक पल के लिए तो यह सोचा है की जो अपने पहले ब्लॉग में लिखूंगा वोह ही यहाँ दोहराऊँगा हिन्दी में....पर अभी कुछ पक्का नहीं है....आने वाला समय ही बताएगा की इस ब्लॉग की किस्मत क्या है.....